Thursday, April 10, 2014

एक महिला हूँ मैं












मैं एक महिला हूँ, सम्मान की भूखी हूँ मैं

एक महिला हूँ मैं
माँ हूँ, बहन हूँ, बेटी हूँ मैं
किसी की अर्धांगिनी हूँ मैं
मुझे भी हक़ है हंसने का, खिलखिलाने का
आसमान में उड़ने का

आधी आबादी हूँ इस दुनिया की
इज्जत हूँ हर घर की
बेइज्जत होती हूँ तो ये बेइज्जती है
हर माँ की, बहन की, बेटी की
एक महिला हूँ मैं
इज्जत हूँ हर घर की
सम्मान की भूखी हूँ मैं

पुरुषवादी समाज में हर पल शोषित होती हूँ मैं
हर पल अपमानित होती हूँ मैं
एक इंसान हूँ मैं, क्या मुझे सिर्फ इंसान के
रूप में नहीं देखा जा सकता
एक महिला हूँ मैं
इज्जत हूँ हर घर की
सम्मान की भूखी हूँ मैं

बंद करो अपनी आँखों से नोचना
अपने व्यंगों से खसोटना
चढ़ा लो हैवानियत की नजरों पे
इन्सानियत का चश्मा
याद रखो तुम्हारे घर में भी हैं
तुम्हारी बहन, तुम्हारी माँ
लज्जा की पर्याय हूँ
इसका मतलब ये नहीं असहाय हूँ
न करो उस स्त्री शर्मसार
जो तुम्हारी माँ है, बहन है, बेटी है

एक महिला हूँ मैं
माँ हूँ, बहन हूँ, बेटी हूँ मैं
इज्जत हूँ हर घर की
सम्मान की भूखी हूँ मैं

"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता"
दुनिया की आधी आबादी को मेरा प्रणाम!

                                                               -Vivek Tripathi
                                                              

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