Sunday, July 12, 2020

लिखा-बनाया

इन गाड़ियों का पलटना
इनके टायरों का पंक्चर होना
एक के बाद एक...

नकलीपन के साज़िश की बू आती है, साहब

पंक्चर न होती 
और पलटती न तो ...
बड़े बड़े आका बेनक़ाब होते
उनकी करतूतों का पर्दाफ़ाश होता

कई नाम ढह जाते 
सारे काम बिगड़ जाते...
तो ये तय था कि
गुर्गे को जाना ही था...
सो गाड़ी पलटनी ही थी
टायर पंक्चर होना ही था

और जिसके जाने का लिखा-बनाया पहले से था
उसे तो जाना ही था...
आख़िर जाने वाले को कौन रोक पाया है, साहब?

                                                             ~ Vivek

#VikasDubeyEncounter

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