मृत्यु को चुन लेने में
आप रिक्त स्थान छोड़ जाते हैं
भूत की, भविष्य की
कुछ संभावनायें जो देखी गयी
और कुछ जो अनदेखी रह गयी
मृत्यु को चुन लेने में
आप अपनों के लिए
जो सूनापन छोड़ जाते हैं
वो न मातम मनाने से भरते हैं
न समय बीतने से
मृत्यु को चुन लेने में
आप उनको भी अधमरा कर देते हैं
जो आपको देखकर
लड़ना सीख रहे थे
जीना सीख रहे थे
मृत्यु को चुन लेने में
आप उन सपनों का गला घोंट देते हैं
जिनके पंख की उड़ान
आपके कंधों पर टिकी थी
आपके चलते रहने पर टिकी थी
काश! कि कोई आये
उस पल में
जब आप अपने लिये
फाँसी का फंदा बना रहे हों
और आपको विश्वास दिला जाये
कि लड़ लेने में क्या हर्ज़ है
ये जिंदगी एक ही बार तो मिली है
तो जीभरके जी लेने में क्या हर्ज़ है
~ Vivek
No comments:
Post a Comment